गुरुवार 18 जून 2026 - 09:20
मुहर्रम के महीने में अहले-बैत (अ) की मज़लूमीयत

इमाम रज़ा (अ) एक रिवायत में मुहर्रम के महीने में अहले-बैत (अ) पर आए दुःखों और कष्टों का उल्लेख करते हैं।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, निम्नलिखित रिवायत बिहार उल अनवार किताब से ली गई है। इस रिवायत का पाठ इस प्रकार हैः

امام رضا علیه‌السلام:

إِنَّ الْمُحَرَّمَ شَهْرٌ کَانَ أَهْلُ الْجَاهِلِیَّةِ یُحَرِّمُونَ فِیهِ الْقِتَالَ، فَاسْتُحِلَّتْ فِیهِ دِمَاؤُنَا، وَهُتِکَتْ فِیهِ حُرْمَتُنَا، وَسُبِیَ فِیهِ ذَرَارِینَا وَنِسَاؤُنَا.

इमाम रज़ा (अ) ने फरमाया:

"मुहर्रम वह महीना है जिसमें जाहिलियत के दौर के लोग भी युद्ध और रक्तपात को वर्जित मानते थे। लेकिन इसी महीने में हमारे रक्त को बहाना जायज़ समझा गया, हमारी पवित्रता और सम्मान को रौंदा गया, तथा हमारे बच्चों और महिलाओं को बंदी बना लिया गया।"

बिहार उल अनवार, भाग 44, पेज 283।

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